#Njm by Kran Sahar

मुहब्बत
जो सीने से गुज़रता हुआ,
आँखों से उतर जाता है
मुहब्बत
जो ज़ुबां पे नहीं,
साँसों में संवर जाता है
मुहब्बत
जो जिस्मों का नहीं,
रूह का मिलना है
मुहब्बत
जो एक तरफ़ा है ,
तेरी इजाज़त के बिना है
मुहब्बत
जो टेढ़ा तो है मगर,
सच्चा भी है
मुहब्बत
जिसमें मरने का नहीं,
बस बिछड़ने का दर है
मुहब्बत
जो शुरू तो एहसासों से होती है,
मगर ख़त्म होने का
कोई रास्ता नहीं है
मुहब्बत
जिस से गुज़र जाओ तो सुकून है,
और डर जाओ तो कुछ भी नहीं
मुहब्बत
जिस की मंज़िल से भी ,
ज्यादा हसीन इसका सफर है
क्या
ऐसी मुहब्बत के तू है काबिल,
ऐ दिल है मुश्किल ।

“सहर”

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