#Njm by Sufi Jakir Nawazi

तलाश ( नज्म…)

घरौंदे से,
पंख फैलाए हुए,
निकला हूं ।
खुले आकाश में ,
उडना सीखा है मैने ।
जानी पहचानी सी ,
हैं मंजिलें ,
आंखों में ख्वाब ए जिन्दगी,
दिल में अरमान हसीं ।
भटक रहा हूँ ,
दर ब दर ,
शहर – शहर ,
गली -गली ,
ढूंढ रहा हूँ ,
एक राह अपनी ।।

सूफी जाकिर ” नवाजी “

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