#Nzm by Neeloo Neelpari

नज़्म…

 

रात गहरी नींद सोती रही

तन्हाई करवटें बदल सुबकती रही

 

रात काफ़िर थी के वो बेमुरव्वत

मैं रात भर शमा जलाये सिसकती रही

 

कब से बिछुड़े हो कब से खोए

तुमको दर-ब-दर देखती-खोजती रही

 

चरागों से उठते स्याह धुंए में रात भर

तेरे अक्स को बनाती-बिगाड़ती रही

 

कभी पंखे, कभी घड़ी की टिकटिक पे

तेरे किस्सों की लड़ियाँ बुनती रही

 

कभी न पुकारूँगी न बुलाऊंगी तुम्हें

दर्दभरी याद में तकिया भिगोती रही

 

यादों-ख्यालों की महफ़िल रात लगती रही

चांदनी हौले हौले मेरे दिल में समाती रही

 

अब के बिछुड़े तो न जी पाएंगे ‘नीलपरी’

चले भी आओ के बहार भी रस्ता तकती रही

 

© नीलू ‘नीलपरी’

 

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