0218 – Vikram Gathania

Kavita :

सफर

दिन का सफर भी क्या
कि अभी गुजरो
ये जो दिखते पहाड़ हैं
यह जो नदिया बहती है
उड़ती चिड़िया जो कहती है
सब छूट जाता है अभी !

रात का सफर भी क्या है
कि खूबसूरत एक स्त्री हुई
उसे ईर्ष्या हु�ई मुझसे
मैं क्यों इतना सुंदर ख्याल
और सोती भी रही मेरी बगल में
उनींदी
बस में
सफर में !


Kavita :

एक लड़के से

**

मैं कह रहा था
एक लड़के से
जैसा है
वैसा ही कुबूल लेना
यह नियति नहीं हमारी
यही तो मान कर
चलते आ रहे हम
कब से !

पर इतना
आसान भी नहीं है
इस नियति को बदलना
कि अवधारणायें
इतनी अस्पष्ट
और विकृत भी
कि लोग
समझते नहीं हैं साजिशें !

लड़के ने कहा था
जब सब पढ़ जाएँगे
समझ जाएँगे लोग
मैंने कहा था
तब तक तो
और भी
अनपढ़ आ जाएँगे
नियति तो हमारी है
और हमें ही
बदलना चाहिए इसे !


Kavita :

यह समय

यह समय है
कि गाय की हत्या रोकने की बात हो रही है
फिर तो किसी भी आदमी को
इस समय आदमी के प्रति भी
संवेदनशील होने की जरूरत हो रही है
माना कि सभ्य समाज की आधारशिला रखी जा रही है
रामराज्य की स्थापना की ओर अग्रसर हो रहे हों
धर्म बढ़ाया जा रहा हो इस तरह
फिर  हत्या आदमी की क्यों हो रही है ?

धर्म अति का धर्म नहीं
पाखंड होता है
रूढ़ी होता है
धर्मान्धता होता है !

माना कि बंदिशें अच्छी होती हैं
पर बंदिशों पर भी बंदिशें हों
तो और भी अच्छा होता है !

रामराज्य लौटे इससे पहले
हर किसान के घर में गाय पले
इतना नैतिक तो हो हिंदू
नैतिकता पढ़ाने से पहले
खेतिहरों को
खेतीबाड़ी करने के लिए प्रेरित करना होगा
किसान को बनाना ही होगा किसान
यह संभव भी है !

इतना ही रहे धर्म
इससे पहले राजनीति सुधरनी है देश की
व्यवस्थाएं बदलनी है देश की
ईमान आये राजनीति में
फिर ईमान आयेगा प्रजा में भी
इसके लिए यह कतई जरूरी नहीं
कि सबको हिन्दू होना ही होगा
इतना भर करना होगा
रामराज्य अगर स्थापित करना होगा !


Kavita :

समझ

**

जो डरता है
वो काम करता नहीं
और जो वह करता है
उसे  लगता है
उसे तो समझ है
उसी का तो वह
करता है इस्तेमाल
उसकी नज़र में
वेबकूफ हैं वह
जो उसकी तरह
समझ का
करता नहीं  इस्तेमाल !

समझ का क्या
खिला पिला कर
कोई भी
मित्र हो जाता है
काम भी कोई भी
जिससे कभी भी
निकल जाता है
वह भी तब
जब वह खुद भी
खाता पीता है
इसी चीज़ का
कभीकभी
गुमान भी
हो जाता है उसे !

और सुबह
जब वही आदमी
गीत गुनगुनाता
मिलता है कुर्सी पर
हम जैसे
पूछ बैठते हैं
क्या बात है
बड़े खुश
नज़र आते हो मित्र ?
हमारा मतलब
खुश होना ही चाहिए मित्र को
और वह
सोच में डूबते हुए
चुप हो जाता है
उदास हो जाता है !


Kavita :

एकतरफा प्रेम

***

हाल ही में
स्कूल कर चुकी
लड़की का नाम
लिखा रखा है
उत्खनित
दीवार पर
असल में
लिख रखा है जिसे
किसी एक लड़के ने
अपने हृदय पर
ताउम्र के लिए
छाप छवि की
सुंदर लड़की की
पड़ चुकी
अब तो !

मैं यह नहीं कहता
यह ठीक है
या गलत है
होगा ठीक
या गलत
अपने अपने
समय पर
पर अच्छा है
लड़की सुंदर है
मासूम है
उसे तो अब
पता नहीं
कहाँ निकल जाना है
पढ़ने के लिए !

और जो लड़का है
कोई भी
वह तो
एकतरफा ही
करता रहेगा प्रेम !

अभिसरण
हो ही चुका
अब तो
कि दिखेगी
वह लड़की
अब तो
ख्वाबों में ही !

पढ़ेगा तो
वह लड़का भी
छवि दिल में लिए
ऊर्जा प्रदान
करती रहेगी
उसे वह
उस सी ढ़ूँढता भी फिरेगा !

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