#Pratiyogita Kavita by Acharya Amit

विजयदशमी पर जलाकर रावण
मन का भरम मिटाते है
ऐसे अंधभक्त है देखो
अक्ल के अंधे कहलाते है
राम नाम का लेकर सहारा
काम किया है रावण का
सीता का अब चिर-हरण है
और देश बना संस्कारों का
लक्ष्मण जैसे भाई नही है
सभी बने हुए है नरभक्षी
कहने को है वेजिटेरिअन
मांग रहे है मांस और व्हिष्कि
अधीर बड़ा अब मन हो रहा है
कैसे मनाएंगे दीपावली
अंहकार में सब है दुबे
अटकलें बड़ी लगाते है
विजयदशमी पर जलाकर रावण
मन का भरम मिटाते है…..
गौण हो गई पीड़ा सबकी
देखकर काग़ज़ के चंद टुकड़े
सब कर रहे है बाबा की भक्ति
माता-पिता का पतन हो रहा
रिश्ते बिक रहे है व्हाट्सअप पर
फ़ेसबुक पर हज़ारो
अब दोस्त बन रहे
कोई नही है सामने पर
दर्द बढ़ रहा दिल मे फिर भी
अकेले अश्रु बहाते है
विजयदशमी पर जलाकर रावण
मन का भरम मिटाते है…..
पढ़े-लिखे सब मन्दबुद्धि
ज़ाहिल देश चलाते है
मन की बात का ढोल पीटकर
काम कर है चोरों का
देश-विदेश में घूम-घूमकर
हल्ला मचा रहे ज़ोरो का
देश की नीति बनी अनीति
ज्ञानी सब अज्ञानी बने
कैसा रामराज्य हुआ है
देश के लीडर विभीषण बने
हनुमान की ढाल बनाकर
बेच रहे है
मर्यादा राम की
रहीम के दोहों का कर दोहन
उसका मजाक उड़ाते है
विजयदशमी पर जलाकर रावण
मन का भरम मिटाते है….
कौन हूँ मैं इस भारत देश का
वो पूछ रहे है मुझसे अब
जेल जा रहे जब है ढोंगी
हो रहे है वो मौन क्यों सब
जितना उनका उतना मेरा
देश किसी एक कि जागीर नही
इसी बात का रोना है प्यारों
कारोबारी भिखारी है
करोड़ो की है संपत्ति बनाई
फिर भी मुँह पर लाचारी है
नौजवान सब जियो से हारे
अपनी जीती बाज़ी को
नेट सेअपडेट होकर देखो
खो रहे अपने रोज़गार सब
हुनर का अपने कोई इल्म नही है
बात है करते धर्म-अधर्म की
ग़ुलामी को हँसकर अपनाते
पाखण्ड आज़ादी का मनाते है
विजदशमी पर जलाकर रावण
मन का भरम मिटाते है….

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2 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by Acharya Amit

  • September 19, 2017 at 6:50 am
    Permalink

    Bahut badiya( satire)

    Reply
  • September 28, 2017 at 7:45 am
    Permalink

    Bohot khub likha h dil chhu liya aapki kavita ne

    Reply

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