#Pratiyogita Kavita by Annang Pal Singh

मायावी  रावण  ने  अपना  राज्य  बढ़ाया  है  !

जन-जन के अंतर मन में अब उसकी छाया है !!

 

पहले उसका राज्य निहित था सीमाओं के अंदर !

तब भगवान राम ने उसको मारा सैन्य सजाकर  !!

अब वह फैल गया जन-जन में ,छुपकर आया है !

मायावी   रावण  ने  अपना   राज्य   बढ़ाया  है !!

अब घुस गई विचारों में , रावण की माया नगरी  !

बहुतेरे जन घूम रहे  हैं ,  लिये  पाप  की  गगरी  !!

अब  वैचारिक  परिवर्तन  का  अस्त्र  बनाया  है  !

मायावी   रावण  ने  अपना,  राज्य  बढ़ाया  है  !!

 

रावण घुसा विचारों में बैठा है घात  लगाये  !

हटी सावधानी तो समझो उसने पर फैलाये !!

बड़ा सलौना आकर्षक सा जाल बिछाया है !

मायावी रावण ने अपना  राज्य  बढ़ाया  है !!

 

रावण का प्रतिरूप जलाते हम हर साल निरंतर !

लेकिन इससे क्या? वह तो बैठा है सबके अंदर !!

जब – जब अंतर में झाँका, रावण को पाया  है  !

मायावी  रावण  ने  अपना , राज्य  बढ़ाया  है  !!

 

शारदीय नवरात्र  साधना  का  व्रत  लेना  होगा  !

माँ की शक्ति ग्रहण कर उसको उत्तर देना होगा !!

तप की किरणों ने रावण को  सदा  जलाया  है  !

मायावी  रावण  ने   अपना  राज्य  बढ़ाया  है  !!

 

शारदीय    नवरात्र   साधना     राम चन्द्र   ने   कीन्ही  !

और विजय दशमी को विजय पताका निज कर लीन्ही !!

सत्य  सात्विकता  ने  यह  व्रत  सफल  बनाया है  !

मायावी   रावण  ने  अपना ,   राज्य   बढ़ाया  है  !!

शुद्ध विचारों के खंजर से काटो रावण सेना  !

दूषित सोच हटाओ मन से , रखो न लेना  देना !!

ग्यान ज्योति के आगे अघ ,तम कब टिक पाया है !

मायावी रावण ने अपना राज्य बढ़ाया है !!

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