#Pratiyogita Kavita by Annu Laguri

आज का रावण..!
कैसा रावण….?
दस सिरो वाला रावण
नही वो रावण..!
संग थी जिसके
राक्षसी सेना,
नहीं ,नही, नहीं ,वो रावण..!
भैया ये रावण है..!
कलयुगी रावण…!
सिस्टम से उपजा रावण..!
संवेदनहीनता की परत लपेटे,
ऐसा ये रावण,
मरता मर जाए कोई,
बीच सड़क गिरे करहाए कोई,
इसे न होता एहसास कोई,
ऐसा ये रावण,
नारी का हो बलात्कार कहीं,
आंखो में पट्टी,..बांधे..!
कानो में रुई डालें,
ऐसा ये रावण…!
सच को झूठलाए,
पाखंडी को भगवान माने.!
ऐसा यह रावण,
नारी की बस चमड़ी भाए,
उम्र क्या है इसे फर्क न होए।।
धर्म के नाम पर इंसान को मारे
खून लहू का देख खुश हो जाए..!
ऐसा यह रावण..!
हर इंसान के अंदर छुपा यह रावण….!

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