#Pratiyogita Kavita by Anoop Maurya

क्यों जलाते हो पुतला सुनो बात मेरी।
आज के जो हैं रावण उनको जला दो।
१)
आंखों मे सपना शिक्षा का भरकर।
सूनी डगर बाला पढने को निकली।
आकर दरिंदों ने अस्मत को लूटा।
घुटघुट के जां उस बाला की निकली।
जिस्म के लुटेरों की अर्थी उठा दो।
आज के हैं ये रावण इनको जला दो।
२)
जोड पाईं पाईं पिता ने बचाई।
बेटी की शादी में पूरी लूटाई।
दहेजी निशाचर बड़े पेट भारी।
लालच अनल जली दुल्हन बेचारी।
बनो राम फिर से इनको सजा दो।
आज के हैं ये रावण इनको जला दो।
३)
आतंकी पूरी दूनिया है दिखती।
निदोषी लाशें लाखों हैं बिछती।
इनका न मजहब न कोई धरम है।
पैसों की खातिर बंदूकें उठती।
बनकर रमापति इनको मिटा दो।
आज के हैं ये रावण इनको जला दो।
४)
भष्ट ब्यापारी बहु भष्ट अधिकारी।
चंगुल में फंसी रोए जनता बेचारी।
भष्ट राजनीति व भष्ट हैं पुजारी।
संसद में बैठे बनकर शिकारी।
बनकर भरत सम तुम संसद संभालो।
आज के भष्ट रावण जड़ से जला दो।
५)
विजय की दशमी बड़ा पर्व पावन।
दिन आज के राम ने मारा रावण।
असुरों का फिर से जमघट लगा है।
मिट जाएं दानव तो आ जाए सावन।
अन्दर के रावण को खुद ही तलाशों।
दिन आज के अपना रावण जला दो।

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One thought on “#Pratiyogita Kavita by Anoop Maurya

  • September 12, 2017 at 6:02 pm
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    Awesome and inspirational lines

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