#Pratiyogita Kavita by Brij Vyas

आज दशानन खड़ा हुआ है ,
रूप लिए घिनौना !
देश भला क्या , सकल विश्व में ,
छोड़ा न कोइ कोना !!

पहला सिर अधर्म है इसका ,
मानवता पर वार !
दूजे सिर यों चढ़ी वासना ,
है नारी अत्याचार !
तीजे सिर पर क्रोध चढ़ा है –
बस विवेक है खोना !!

चौथे सिर पर नफरत छायी ,
कुनबा ही मन भाये !
पंचम सिर नाचे बर्बरता ,
केवल रक्त बहाये !
और छठे सिर हिंसा है बस –
यहां भला क्या होना !!

सप्तम सिर पर लोभ चढ़ा है ,
जग अधीन हो अपने !
अष्टम सिर पर है घमंड जो ,
दिखा रहा है सपने !
नवमे सिर पर धर्म मोह है –
इंन्सा बना खिलौना !!

दसवें सिर विस्तार बसा है ,
ना सीमा का बंधन !
मारकाट है , लूटपाट है ,
मचने दो बस क्रंदन !
मिल जुलकर हमें लड़ना होगा –
जीवन बने सलोना !!

हृदय हृदय में राम बसावें ,
रिपुदमन रखें ध्यान !
रामराज्य हो सकल विश्व में ,
गूंजे यह मधुगान !
अलख जगे , एक नया जागरण –
भागीदारी होना !!

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50 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by Brij Vyas

  • September 24, 2017 at 2:38 pm
    Permalink

    बेहद खूबसूरत रचना !

  • September 24, 2017 at 2:42 pm
    Permalink

    आज का सटीक चित्रण ।

  • September 24, 2017 at 4:18 pm
    Permalink

    Ek Dum sahi lines abhi chal rahi halat ko dekh kar..
    Shandaar, Shandaar.

  • September 24, 2017 at 4:31 pm
    Permalink

    Very nice.. enjoyed this

  • September 24, 2017 at 4:49 pm
    Permalink

    शानदार,लाजवाब,सुंदर रचना।

  • September 24, 2017 at 5:00 pm
    Permalink

    अति सुन्दर रचना

  • September 24, 2017 at 5:35 pm
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    शानदार! अद्भुत रचना ।

  • September 24, 2017 at 5:37 pm
    Permalink

    आपकी रचना मन को भा गई। बहुत सुंदर।

  • September 24, 2017 at 5:40 pm
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    तारीफ के लिए शब्द नहीं मिल रहे।

  • September 24, 2017 at 8:47 pm
    Permalink

    बहुत ही सुन्दर रचना,
    सटीक चित्रण

  • September 25, 2017 at 4:03 am
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    Bahut sundar rachna

  • September 25, 2017 at 4:42 am
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    Beautiful lines…

  • September 25, 2017 at 4:53 am
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    आज का सार्थक चित्रण करती रचना !

  • September 25, 2017 at 5:06 am
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    ताजा घटनाक्रम को अभिव्यक्त करती सुन्दर रचना ।

  • September 25, 2017 at 5:12 am
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    आतंक को सही परिभाषित करती हुई शानदार कविता ।

  • September 25, 2017 at 5:49 am
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    Suppppeerr…… Se Bhi upper….

  • September 25, 2017 at 8:00 am
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    आतंक की सही परिभाषा सरल शब्दों में ,सराहनीय ।

  • September 25, 2017 at 9:10 am
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    आतंक पर करारा व्यंग करती हुई प्यारी कविता ।

  • September 25, 2017 at 9:47 am
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    You have bundled all the complex issues in literally simplest words.many thanks for sharing it.

  • September 25, 2017 at 12:04 pm
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    उत्कृष्ट रचन,वर्त्तमान परिवेश का दर्पण,सराहनीय ।

  • September 25, 2017 at 12:15 pm
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    अति सुंदर रचना , सत्य कथन ,सही चित्रण के साथ !

  • September 25, 2017 at 12:20 pm
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    यथार्थ के धरातल पर रची गयी शानदार कविता ।

  • September 25, 2017 at 1:23 pm
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    Best Kavi of India….sh. Bhagwati Prasad ji…crown of mp….heart touching lines….

  • September 26, 2017 at 8:11 am
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    सही सोच , सही लेखन ,सही दिशा पाठकों के लिए ।

  • September 26, 2017 at 8:15 am
    Permalink

    निसन्देह लाजवाब रचना , प्रशंसनीय !

  • September 26, 2017 at 8:17 am
    Permalink

    सरल शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति !

  • September 26, 2017 at 8:20 am
    Permalink

    सरलतम शब्दों में भावनापूर्ण , वैचारिक रचना ।

  • September 26, 2017 at 8:25 am
    Permalink

    आतंक को दशानन के रूप में सही परिभाषित किया है ।

  • September 26, 2017 at 8:27 am
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    रावण की मूल बुराइयों को इंगित किया है !!

  • September 26, 2017 at 8:31 am
    Permalink

    कविता हो तो ऐसी , सम्पूर्ण , सार्थक , सचेतक /

  • September 26, 2017 at 8:37 am
    Permalink

    आतंक का सही आकलन , सही परिभाषा /

  • September 26, 2017 at 10:17 am
    Permalink

    जानदार , शानदार , काबिले तारीफ रचना ।

  • September 26, 2017 at 10:20 am
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    सम सामयिक रचना , वर्तमान सन्दर्भ को कुरेदती हुई

  • September 26, 2017 at 10:23 am
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    सबके अंतर्मन को टटोलती हुई सार्थक रचना ।

  • September 26, 2017 at 10:41 am
    Permalink

    शानदार शब्द संयोजन , सुंदर अभिव्यक्ति ।

  • September 27, 2017 at 11:35 am
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    प्रशंसनीय , बेहतरीन , लाजवाब कविता ।

  • September 27, 2017 at 11:50 am
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    प्रेरक रचना , बुराइयों की जड़ को पकड़ती ।

  • September 27, 2017 at 11:53 am
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    जानदार , शानदार , एक उत्प्रेरक रचना ।

  • September 29, 2017 at 9:22 am
    Permalink

    खूबसूरत रचना ,अंतर्मन को कुरेदती हुई ।

  • September 29, 2017 at 9:27 am
    Permalink

    सार्थक , सटीक , समय की नब्ज टटोलती कविता ।

  • September 29, 2017 at 11:03 am
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    अच्छी रचना जो आज का आईना दिखाती है ।

  • September 29, 2017 at 11:05 am
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    ताज़ा सन्दर्भ की तथ्यपरक रचना है यह ।

  • September 29, 2017 at 11:08 am
    Permalink

    रावण के दुर्गुणों की सही व्याख्या करती कविता ।

  • September 29, 2017 at 11:10 am
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    रावण के रूप में विद्यमान दुर्गुण आज भी यही हैं ।

  • September 29, 2017 at 11:12 am
    Permalink

    आतंक और रावण का सही आँकलन ।

  • September 29, 2017 at 11:15 am
    Permalink

    रावण का खात्मा हमें करना ही होगा , कब तक ।

  • September 29, 2017 at 11:18 am
    Permalink

    रचना ने सही विषय का यथार्थ चित्रण किया है ।

  • September 30, 2017 at 5:33 am
    Permalink

    आपकी लेखनी को प्रणाम , क्या खूब लिखा ?

  • September 30, 2017 at 5:35 am
    Permalink

    उच्च कोटि का लेखन है सर जी !

  • September 30, 2017 at 5:42 am
    Permalink

    सचमुच सराहनीय लेखन है आपका !

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