Pratiyogita Kavita by Abhishekh Bharti ‘ chandan ‘

सावन

मुझको भी कुछ अब कहने दो।

ये जो सावन है इसे रहने दो।

बरखा सा मैं भी तो बरसा था।

उनके भी सितम अब सहने दो।

सावन ने ये कैसी कहर ढाई।

संग अपने वो पूर्वा ले आई।

आती वो अकेले तो ठीक मगर।

उनकी यादें संग ले आई।

बिन सावन बरसात पुरानी हुई।

कातिल अब उनकी जवानी हुई।

बैठ झूलो पर इजहार किया।

प्यार उनका सावन की निशानी हुई।

पल याद पुराना आता है।

सावन जब सुहाना आता है।

घर देर से जब जाने पर।

याद उसका बहाना आता है।

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One thought on “Pratiyogita Kavita by Abhishekh Bharti ‘ chandan ‘

  1. दिल की धड़कन कितनी उधासी थी आँख हमारी बंद न हुई;

    उस दर्द- से भी दिल की धड़कन कम न हुई;

    माला से टूट के मोती वैसे बिखराते हे

    नाशिलि आखो से आशु गिरते हे

    नाग-फ़नी सा शोला है जो आँखों में लहराता है;

    आखो कभी हम-दम न बनी और नींद में रुलादेता हे

    वो यादों की परछाईं नींद में लेके फिरता हूँ;

    मैंने बिछड़ कर माँ के सपनो पुन: याद करता हु

    मेरी नजर जुक जाती हे उन्ही के चरणों में हे

    सात जनम की प्यास बुज जाती हे उन्ही माँ के कदमो से हे
    विनोद बैरागी
    शाजापुर म.प्र.
    7697462007

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