Pratiyogita Kavita by Dilip Singh Charan

सावण

सावण आय सुहामणो , खामंद तू मत खीज  ।

सांध सुं लाडु सांतरा , मति भूले ना तीज ।।

हिवड़ो ललचै हिण्डवा , मांडू खेजङ डाल ।

हिण्डा सागै हिण्डसां , रमसा सरवर पाल ।।

हरिया भरिया खेत है  , पिउ पिउ बोले मोर ।

लहरे बाजरियां लरर , पाकै फसलां जोर ।।

मूंग  टिंडसी मोठड़ी  , तोरू   ला सूं तोड़ ।

साग बणा सूं सांतरो , पिया परदेस  छोड़ ।।

हरिया हरिया खेत में , खेजड़ले  री   छांव ।

रमत रमसां नवी नवी , पिया पधारो गांव ।।

•••••••••••••••••••••••• दीप चारण

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One thought on “Pratiyogita Kavita by Dilip Singh Charan

  • September 13, 2016 at 4:30 pm
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    Bhut bhut Aabhar kavyasagar.com

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