#Pratiyogita Kavita By Dr. Sarla Singh

बादरिया

बरसे बादरिया झूम-झूम ,

हरसे हियरा छाये उमंग ।

धरती गाये गीत पवन संग,

चहकें चिड़िया अति प्रसन्न।

सब ओर मुदित जीवन अपार,

सब खेत, बाग,वन नाच.रहे ।

हर्षोल्लास की वेला आई ,

नदिया ,तालाब सब नाच रहे ।

मनमयूर हर्षित अपार,

बादरिया संग नाच रहा ।

अम्बर की खुशी है छलक पड़ी,

वसुधा मन ही मन मुस्काय रही ।

हरित चुनरिया रही सम्भाल ,

बरसे  बादरिया   झूम-झूम  ।

मन नाच रहा हो मुदित अपार,

स्वागत में पलक है रहा बिछाय ।

बिन बादरिया जग है सूना ,

जग बादरिया का रिश्ता महान ।

है किसान की मीत बदरिया ,

धरती के हृदय की धड़कन ।

खेत, बाग ,वन की श्रृंगार ,

बरसे बादरिया झूम-झूम ।

घन गरज रहे काले-काले ,

चमके बिजली इतराइ फिरे ।

नाचे मयूर ,मदमस्त पवन,

गाये कोयलिया  सप्त राग ।

भइ मुदित धरा,अतुलित अपार,

बरसे  बादरिया   झूम -झूम ।

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