24 thoughts on “Pratiyogita Kavita by Harish Soni

  • September 21, 2016 at 1:01 pm
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    मित्रों सादर नमन
    मित्रों कृपया मेरी कविता के बारे में अपनी राय प्रेषित करें। कुछ सुधार की आवश्यकता हो तो बताइये।

    समीक्षा का इंतजार रहेगा।
    हरीश सोनी ” पथिक”

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  • September 21, 2016 at 1:01 pm
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    पथिकजी सावन पर बहुत ही सुंदर कविता लिखी है आपने
    बधाई।

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  • September 21, 2016 at 1:26 pm
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    Very nice line

    I like it

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    • September 22, 2016 at 4:23 pm
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      धन्यवाद् जी
      बस यूँ ही आप लोगो का साथ बना रहे।

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  • September 22, 2016 at 2:55 pm
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    ‘पथिक’ जी दो महीने बाद भी सावन की याद दिला दी। बहुत सुंदर काव्य पंक्तियाँ लिखी है।

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  • September 23, 2016 at 11:06 am
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    सावन मे बारिश की बूंदे ,बचपन की याद ताजा कर दी ।बहुत ही शानदार कविता है जीवन के हर पहलु को छू कर दिल कॊ झकझोर कर दी ।बधाई बधाई बधाई

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  • September 29, 2016 at 4:17 pm
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    Very very nice Poem.
    I appriciaate you Harish .

    Keep it up this sprit.

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  • October 2, 2016 at 3:07 am
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    अति सुंदर लाईन सर जी

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  • October 4, 2016 at 2:19 am
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    Nice not nice but very very nice………………

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    • October 4, 2016 at 4:05 pm
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      अरे गज़ब ।
      आपका तो अंदाज़
      अंदाज़ जैसा ही हे।।
      सिद्धार्थ जी
      Thanks dost

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  • October 4, 2016 at 12:27 pm
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    बहुत ही सुन्दर रचना आपको बधाई

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  • October 8, 2016 at 4:32 pm
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    न जाने हे कुओं आप की रचना को पढ़ कर चातक पक्षी की तरह जीवन की कठनाइयों , को माँ का अंचल सावन सा प्रतीत हो रहा है

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  • October 13, 2016 at 3:10 pm
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    अति सुंदर पंक्ति

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  • October 23, 2016 at 5:39 pm
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    आदरणीय पथिकजी
    अब सावन गुजर चुका है, शीत ऋतु आने वाली है।
    कोई ऐसी रचना अवतरित करे की शीट ऋतु मे उसे पड़कर गर्मी का अहसास हो ।
    सुभकामनाओ सहित करे तैयारी ।।।।।।।

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    • December 15, 2016 at 4:10 am
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      जी डॉ साहेब
      आपके आदेश का पालन करने की कोशिश की जायेगी

      Reply

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