pratiyogita kavita by jayanti prasad sharma

पाखी

माँ, मैं जग में आना चाहती हूँ

मुझे जन्म दे दो।

मत करो गर्भ में कत्ल,

मुझे जीवन के रंग दे दो।

तू कितनी सुन्दर और खूबसूरत है।

नेह टपकता आँखों से

ममता की मूरत है।

मत कर माँ लिंगभेद

अपने ममत्व का कुछ अंश दे दो…………………मै जग में…………………..।

मै लड़की होकर भी

लड़कों से ज्यादा काम करुँगी।

भर दूंगी खुशियों से आँगन,

रोशन तेरा नाम करुँगी।

स्वयं सिद्ध करने को मुझको,

जीवन के दिन चंद दे दो…………………मै जग में…………………………. ।

मै पाखी बन कर नील गगन में उड़ जाउंगी,

बन कर बदली तेरे घर में खुशियाँ बरसाऊँगी।

बैठ मुंडेर पर तेरे घर की,

कोमल से मीठे बोल सुनाऊँगी।

मैं मानूँगी तेरा आभार,

मेरी उडान को भावना के पंख दे दो…………………मै जग में………………।

जयन्ती प्रसाद शर्मा

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One thought on “pratiyogita kavita by jayanti prasad sharma

  • November 24, 2015 at 2:29 pm
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    This is owosom finest melodiest heart touching. Im totally fan of this —

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