#Pratiyogita Kavita by Kapil Kurbe

चमकती बिजली
गरजते बादल
टर्राते मेंढक
टीप टीप करती
वर्षा की बूंदे

बहती पवन
बहता पानी
बहते बादल

नव स्नान की हुई
नव पुष्प पत्तियां
रूके हुए पानी पर
नव बूंदो के पड़ने पर
नव भंवरों का बनना
निरंतर…

आसमान पर
सतरंगी ईंद्रधनुष
(जो अभी आधा ही बना है)

आनंदित करता है
उन्मादित करता है…

पर…
भीगा सा मौसम
भीगी सी हवाएं
भीगी सी मिट्टी
भीगे भीगे पंछी
भीगा सा आलम

भीगी सी यादें
(जो अभी तक धुंधली थी)
उसे वर्षित जल
धुल देता हो जैसे…..
याद दिलाता है , तुम्हारी
निरंतर…

सारी भीगी यादें
इसी मौसम में मिलकर
बिछड़ने तक की

फिर भले ही
रूक जाए यह बारिस…
आंखो की बारिस
बरसते रहती है
बिना गरजें
बिना चमकें
निरंतर…….

कपिल कुर्वे
पता- किर्ती निकेतन
RIE भोपाल म. प्र.
Pin 462013
No.7509590403

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