#Pratiyogita Kavita by Kavita Saxena

सावन की फुहार

मन में लेकर आयी बहार

मोर लगे नाचने

पक्षी लगे मुस्कारने

तपिश ने किया बेहाल

गर्मी में कोई न पूछे किसी का हाल

आकाश से बारिश की बूंद जब पृथ्वी पर आयी

धरती भी थोड़ा इठलाई

बोली बहुत सही तपिश अब न चार महीने सहूंगी

बारिश के साथ अब अठखेलियाँ करुँगी

पेड़ पौधों में भी उमंग आई

हर तरह ख़ुशी ही ख़ुशी छाई

किसान करते हैं तेरा इन्तजार

क्यों उनका जुड़ा हैं तेरे संग व्यापर

यदि तू आयी  तो किसान भूख से मर जाएंगे

हे बारिश तू हर साल आना

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