#Pratiyogita kavita by Meenakshi kaith mottan

ए सावन अभी तेरा कोई काम नहीं है
जिसमें मैं समा जायुं अभी वो जाम नहीं है।
अब के छोड़ दे प्यासा तू इस धरती को,
क्यों, तू बरसे जब मोहब्बत पास नहीं है।
कर इतनी सी मेहर हम पे,
हमारे आँगन से जरा हटके बरस।
याद आती है उनकी जब तू आये,
क्या तुझे ओर कोई काम नहीं है।
इक-इक बूँद लगती है अंगारों सी,
तेरी बूंदों में अभी वो आराम नहीं है।
ले जा वापिस इनको अभी तू, अभी उनके आने का भी कोई पैगाम नहीं है।
अपने बादलों से कहदे कि छोड़ दे, मेरे हिस्से की धरती को प्यासा।
अभी इन अखियों के सावन का रुकने का कोई नाम नहीं है।

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