#Pratiyogita Kavita by Nawal Jopshi

सुंदर गीत सावनी रच कर कैसे मन स्पंदित हो
जब अपनी धरती बारिश की बौछारों से वंचित हो

हे श्रीमान पुरंदर कुछ तो हमरी भी अरदास सुनो
मरु धरती के लिये मेघपति क्यों कर हुए विलंबित हो

सूखे इसी आस में आंसू शायद सावन हरषा दे
आँखों से हरियाली देखे हलधर उर आनंदित हो

और जगह जलधार भयंकर इधर एक भी बूँद नहीं
क्या सरकारी तुष्टिकरण से इंद्रदेव अनुबंधित हो

सबको अपने हक़ का पहुँचे क्या यह तेरा फ़र्ज़ नहीं
क्यों पानी अनाज़ चारे से कोई जीवन वंचित हो

इंद्र तुम्हारी कुटिल कथाएं कहाँ किसी से छुपीं बता
पक्षपात अब छोड़ मतंगी मरुधर से अभिनंदित हो

बहुत होगये छल-कल मेघा अब तो गागर छलका दे
मनमोहक अभिराम सुसज्जित आलोकित धर वंदित हो
– नवल जोशी

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