Pratiyogita Kavita by Chaudhari Arjun Thalod

विजय दशमी

दिल में आयी तब हमारे खुशियाँ हजार,
आया जब बीच हमारे “विजय दशमी” का त्यौंहार ।
लोभ, कपट, कलह, मिथ्या, अत्याचार से समाज भरा हुआ है,
इन सब मुखङो से हर समाज डरा हुआ है।
इन सब रावणों को मिलकर हम मिटायेंगे,
स्नेह, सौहार्द, एक का पाठ सबको हम पढायेंगे।
बनके कलयुगी रावण जो बात बात पर दंगा कराते है,
धर्म, जाति,सम्प्रदाय की आङ में हमें आपस में वो मराते है।
एेसे दशाननों का आओ करे मिलकर हम संहार,
भोले-भाले, अटुट समाज पर फिर ना करे कोई प्रहार।
सच्चाई के मार्ग पर हमें सबको साथ चलाना है,
व्याप्त जो समाज में बुरी कुरुतियों को हमें मिटाना है ।
बहन-बैटियों को इन कलयुगी राक्षसों से बचाना होगा,
“सुरक्षित हो हर अपनी लक्ष्मी ”यह वादा बहनों का निभाना होगा।
देखो आज इस पिढी में आये है दशानन हजार,
जाये नजर जहां दिखे युवा,बच्चे धुत नशे में अपार।
विनती है इस अर्जुन की ना करो कोई आप गलत धंधे,
विजय करोगे सबके दिलों में दिखाऔ बनके नैक बंदे।
एसा राज्य राम का हमें ही बनाना होगा,
हर बंधु को लगाकर गले दर्द दुर उनका कराना होगा ।

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