#Pratiyogita Kavita by Dr. Ved Prakash

हर वर्ष मनाते हैं हम सब,विजय दशमी का त्योहार।

रावण को राम ने मारा, हैं ऐसा अपना विचार।।

ये है प्राचीन  परम्परा, हम सब इस पर हैं चलते,

इस दिन देश में अपने, हैं लाखों रावण हैं जलते।

पुतले रावण के जलाकर, मानते हैं  हम अपना उद्धार,

रावण को राम ने मारा, हैं ऐसा अपना विचार ।

विजय असत्य पर सत्य की,दिखाते हैं हम पुतला जलाकर,

राम विजय का जश्न हम, मनाते हैं पुतला जलाकर ।

यदि रावण यूँ  ही मर जाता, तो हो जाता जग का उद्धार,

रावण को राम ने मारा, हैं ऐसा अपना विचार ।

पुतलों के फुॅकने से,क्या रावण मरता हैं?

हम आज बताते तुमको, रावण कैसे मरता हैं?

अपने मन के रावण का, कर दो तुम स्वयं संसार,

रावण को राम ने मारा, हैं ऐसा अपना विचार ।

काम, क्रोध, लोभ,मोह और अहंकार को तुम मिटाओ,

अपने मन-मन्दिर के तुम, रावण को मार भगाओ।

होगा जीवन सफल तुम्हारा, होगा इस जग पर उपचार,

रावण को राम ने मारा है ऐसा अपना विचार ।

हम सबमें भी रावण है, पुतले का क्या जलाना,

भट्टी में योग की जलकर, कुसंस्कार अपने जलाना।

ये पुतला भी सॅवरेगा, होंगे इसमें संस्कार,

रावण को राम ने मारा, है ऐसा अपना विचार ।

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