#Pratiyogita Kavita by Dr. Vinita Rahurikar

आज भी जिंदा है….
बहुत धूमधाम से
हर नियत तिथि को
इकठ्ठा होते हैं
हजारों लोग और
जलाते हैं रावण का पुतला
हर साल, बिना नागा…
तब भी चारों ओर
बढ़ता ही जा रहा है
बुराई का अट्टहास
एक रावण की जगह
लाखों करोड़ों रावण
जन्म लेते जा रहे हैं……
शायद हमें रावण को
जलाने की बजाय
राम का राज्याभिषेक
करना चाहिए, अपने दिलों में
ताकि अच्छाई जिंदा रहे…..
हम रावण के तमाम अच्छे गुणों को
जला देते हैं पुतले में
और उसके दुर्गुणों को
अपने अंदर बचाकर ले आते हैं
तभी हजारों सालों में भी
जला नहीं, कुंदन की तरह
और निखरता ही जा रहा है
दिन प्रतिदिन….
बढ़ती जा रही
बुराइयों के रूप में
रावण से भी बहुत बुरा एक रावण
जिंदा रहता है
हम सबके भीतर….

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6 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by Dr. Vinita Rahurikar

  • September 25, 2017 at 9:17 am
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    बहुत सुन्दर रचना , विनीता जी बहुत बहुत बधाई ।

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    • September 26, 2017 at 5:07 am
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      बहुत बहुत धन्यवाद आपका रेणु जी।

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  • September 25, 2017 at 1:41 pm
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    Bahut sunder Kavita he,such me Hume apne andar ke ravan ko khatam kerna Chey

    Reply
    • September 26, 2017 at 5:08 am
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      धन्यवाद रितु जी।

      Reply
  • September 26, 2017 at 5:03 pm
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    बहुत सुंदर कविता। बधाई

    Reply
    • September 27, 2017 at 1:07 pm
      Permalink

      धन्यवाद नीरज जी।

      Reply

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