Pratiyogita Kavita By Harprasad Pushpak

रावण अभी मरा नही है(व्यंग)
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रावण अभी मरा नही है
आज भी जिन्दा है
प्रकृति के नियम तोड़ नही पाता
इस लिये अदृश्य है
सामने नही आता
अब भी हर साल जलाया
निराकार होकर भी
कैसा हड़कम्प मचाया
राम रावण का युद्ध
अभी भी जारी है
कहीं हल्का तो कहीं भारी है

जो अपने आप को
राम के पाले में बता रहे हैं
वो भी चोरी छिपे
रावण का ही आशीर्वाद पा रहे हैं
स्वार्थी नेता/दलाल/आतंकवादी
सब उसी का संरक्षण पा रहे हैं

स्पष्ट दिखाई दे रहा है
सब को रावण की
सोने की लंका भा रही है
तभी तो देश में
भ्रष्टाचार की बाढ़ आ रही है ।

कुछ ने तो उससे भी
आगे निकलने का लक्ष्य बनाया
तभी तो राम के कुनवे से
मुंह फेर
रावण को आदर्श बनाया
रावण की नीति
ढोंगी भोगी स्यंभू
बाबाओं को भा रही है
असली से ज्यादा नकली पर
चमक आ रही है
ताड़का स्वरूप नखा भी
खूब गुल खिला रहीं है
खुद को मां देवी का अवतार
बता रही हैं
जनता सोने की लंका के
फेर में फसी
एक बाबा तो कमाल ही कर गये
खुद ही राम रहीम
गुरमीत इंसा बन गये
अब हनुमान ने
कुछ को लपेटे में लिया है
कुछ और भी लपेटे में
आने बाले है
जो खुद को भगवान
बताने बाले है
प्रक्रिया जारी है
देखो अब किसकी बारी है
हनुमान अंगद नलनील सुग्रीव
निरन्तर कर रहे है प्रहार
मेघनाथ कुभ्करण खरदूषण
सब की कर दी मिटटी ख्वार
जय श्री राम गा रहे है
आगे बढ़ते जा रहे है

बिभीषण ने रामसे कहा
प्रभू ! रावण अभी मरा नही है
नाभी का अमृत
जब भी कुलबुलाता है
रावण फिर खड़ा हो जाता है

सालों से ऐसा ही होता आया
हर बर्ष रावण को जलाया
परन्तु ! उसका प्रभाव
बढ़ता ही जा रहा है
अब कूट नीति अपना रहा है
स्वंय सामने नही आ रहा है

इस बार नया प्रयोग करना होगा
आजीवन जेल की सलाखों मे
उस रावण को धरना होगा

रावण सुन कर मुस्कुराया
और राजनीति का मंत्र बताया
सुनो राम !
कोई मेरा कुछ नही बिगाड़ पाता
यदि कुल कलंकी लंक

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