#Pratiyogita Kavita by Hemlata Sisodiya

आज का रावण
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आज तो रावण हर इंसान में छिपा रहता है ।
दसों शीशों को खुद अतंस में लिए बैठा है ।
उसमें हिम्मत नहीं जैसा है प्रत्यक्ष दिखे सबको ।
इसलिए चेहरों पे नकाब डाले फिरता है
भीड़ के सामने कहता है बुरा था रावण ।
खुद के ऐबों को खुद से छिपाए रहता है ।
आज तो नारी क्या कन्या का हरण होता है ।
फिर भी आततायी उन्मुक्त बना रहता है ।
एक रावण का मसला हो तो हनन करें उसका ।
यहाँ रावण बसे इतने कि राम भी खमोश रहता है ।
आज की बहन भी चाहती है भाई रावण हो ।
महफूज खुद को पाती है बचाव उससे रहता है।
आज का रावण हर पल छलावा करता है ।
खुद रावण है फिर भी रावण जलाता फिरता है।

हेमलता शिशौदिया

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