Pratiyogita Kavita By Ishq Sharma

विजय दशमी ••••••••
● दशहरा हैं मर मिटेगा अह्म से भरा नाम।।
● बाण चलेगा धनुष से जिनके है वो श्री राम।।
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● हर घर में रावण बैठा कैसे लगे लगाम।।
● बगल रहे छुरी इनके मुख से निकले राम।।
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● काम क्रोध सब मोह त्याग ले प्रभु का नाम।।
● चरण में इनकी तुमको मिलेगा चारो धाम।।
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● प्रेम ही इश्क़ मुहब्बत प्रेम ही बनता काम।।
● प्रेम करो प्रभु से लोगो ये प्रभु का दूजा नाम।।
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● जलते रहे अह्म के पुतले हो सका न नाश।।
● खुली आँखों से देखकर भी नही हुआ विश्वास।।
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● अहंकारियों का सुन लो सदा हुआ सर्वनाश।।
● कोई न छोड़े अह्म को हृदय के रखते पास।।
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● आज नही तो सुन लो कल होकर ही रहेगा।।
● नाश तन मन सबको कर अह्म ही जियेगा।।
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● करो दहन अपने अह्म ओ आज के रावण।।
● तन की शुद्धि की तरह शुद्ध करलो आत्मन।।

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