#Pratiyogita Kavita by A K Mikshra

रावण

बहन की अस्मिता की खातिर
मर्यादापुरुषोत्तम से भी लड़ा उसने।
बहन के सम्मान की रक्षा को
जगत जननी को भी हरा उसने।

आज के ये पापी कभी
रावण नही बन सकते है।
ये दूसरों की क्या अपनी बहन
की भी रक्षा नही कर सकते है।

इनकी तुलना उस महान से
क्या करते हो तुम।
आज भी उस व्यक्ति की महानता
स्वीकारने से डरते हो तुम

वो तुम्हारी नज़रों में पापी था
पर मेरी नज़रों में महान था।
उसने अपनी बहन की इक्षा की
खातिर किया खुद को कुर्बान था।

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2 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by A K Mikshra

  • September 29, 2017 at 6:54 am
    Permalink

    Wah wah…kyaa bat hai..bahut badiyaa.

    Reply
  • September 29, 2017 at 7:03 am
    Permalink

    kyaa bat hai. Rawan ki acchai bhi hai.

    Reply

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