#Pratiyogita Kavita by Kavita Saxena

कलयुग में आया रावण राज

आज हर आएं  दिन  सीता लुटती हैं
एक वो रावण साधु का भेष बनाकर आया
फिर भी सीता को न छू पाया
आज वो साधु राम का नाम बनाया
आश्रम में हर महिला को अपनी हवस का शिकार बनाया
उसमे में से एक सीता उसका काल बन कर आई
उसे जेल की दीवारों तक खींच लाई
हर अवला अब जागो
जुलम करने वालों की गर्दन काट डालो
क्यों डरे हम किसी से ये नेता हमारा कुछ नहीं कर पाएंगे
कानून के आगे ये भी डर जायेंगे
साधु इनकी छत्र छाया में फलते फूलते हैं
आज भी इनके चेले इनके आगे घूमते हैं
अपनी आखों से काला चश्मा उतारो
सही गलत को पहचानों
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6 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by Kavita Saxena

  • September 6, 2017 at 11:51 am
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    Beautifully written 🙂

  • September 7, 2017 at 6:04 am
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    Very well written

  • September 7, 2017 at 6:10 am
    Permalink

    Well written and completely relatable to the present times

  • September 7, 2017 at 6:34 am
    Permalink

    Butiful piece of writing

  • September 7, 2017 at 7:45 am
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    Amazingly written

  • September 7, 2017 at 10:54 am
    Permalink

    Awsome ..great lines ….beautiful peace of lines

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