#Pratiyogita Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

आज का रावण भी जिंदा हैं
जानकर मानवता शर्मिन्दा हैं

दहन करने क्यों राम नही आता
दहशत में मुल्क का वाशिंदा हैं

अय्यासी का अड्डा है ये डेरा भी
हो रहीं चारो तरफ फिर निंदा हैं

चोला पहन राम का ये रावण भी
गलत काम करता कुछ चुनिंदा हैं

कुटियां नहीं आलीशान आश्रम हैं
लुटेरा बहुत लूटना ही धन्दा हैं

हे राम चले आओ रावण को मारो
मुश्किल में आज तेरा बन्दा हैं

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