#Pratiyogita Kavita by Kshama Sisodia

“काल का पहिया घूमे रे भइया ,
लाख जतन इंसान करे “।
इबादत तो एक मुकाम है ,सच्चा वही फरमान करे ।
धरती पर सिर झुकाओ ,और दुआ कुबूल आसमां करे ।
“अन्धभक्तों ” की दीवानगी सड़कों पर लोटती है ।
अब कैसे समझांए इन नादानों को ।
इनकी वजह से ही उपजते हैं
अभी भी
“रावण और दुःशासन” भी ।
ऐसे “सच्चे डेरों” का
“रावण के लंका का
पहले तो कुछ परिभाषा
तय हो ।
राम के भक्त हो या
रहीम के बंदे
रचते ही रहते हैं यह सब “फरेब के फंदे” ।

इनका भी एक “आधार-कार्ड” बने ।
तो असहाय जीवन का कुछ उद्धार बने
करोड़ो की गाड़ियों में चलने वाला
अब रहेगा वह जेल के मोटी सलाखों में ।
वक्त का जब फैसला होता है
तब विलासिता के गवाही की
जरूरत कहाँ ?
कानून के इतनी बड़ी फौज को लगाना पड़े
एक “सच्चे-डेरे” वाले पर ?
मुठ्ठी भर गुंड़ों ने रखा सिस्टम को
अपने ठेंगे पर ।
डर गयी दिल्ली ,काँप गया पंजाब
बूटों की ठक-ठक करती रह गयी
अपनी सरकारी “फ्लैग-मार्च”
जल गयी सरकारी सम्पत्तियाँ
और
चली गई हैं फिर कुछ निर्दोष जानें ।
एक ही नही कई और शहरों में भी आगजनी ने
अपना काम किया
“स्वाहा हो नर-नारी
रावणी मंसूबों से”
आखिर क्यों /कैसे ???

सज़ा सुन रो पड़ा वह रावण ।
फिर “हाँथ जोड़ माँगी थी भीख रहम की”
“राम का रूप धरा हुआ वह रावण ”
थर-थर काँप रहा था ।
मिली सज़ा
“सश्रम कारावास” की ।
स्वयंभू भगवान बना
“रावण” को ।
अब तो अपने
दुष्कर्मों को बाहर निकाल दो ,सभी छुपे हुए रावण के अनुयायिओं ।

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One thought on “#Pratiyogita Kavita by Kshama Sisodia

  • September 4, 2017 at 7:10 am
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    Yes this is true presentation of recent event…We shouldn’t support such person as they are not good for society.

    Reply

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