#Pratiyogita Kavita by Mahender ‘Dilwale’

आज का रावण

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कल का रावण आज जिन्दा है,सफ़ेद घोसलों में बैेठा परिंदा है,

आज का रावण जिन्दा है।

मरे हुए को सदियां बीत गई,जारी चौपड़ धंधा है,

आज का रावण जिन्दा है।

जिश्म फ़रोसी की मन में रहती है,वो नाम एक चुनिंदा है,

आज का रावण जिन्दा है।

भाई-भाई का दुश्मन बन बैठा,धन-दौलत की चिंता है,

आज का रावण जिन्दा है।

बाप बेटी का रिश्ता था अनूठा,आज कोरी निंदा है,

आज का रावण जिंदा है।

माँ,बहन,बेटी,ना बख्शे,हाल इंसान का गन्दा है,

आज का रावण जिन्दा है।

वर्षो भर की गुरूओं की पूजा,आज गले में फन्दा है,

आज रावण जिन्दा है।

Mahender”दिलवाले”
श्रीगंगानगर(राज.)
मो.-9079541894

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