Pratiyogita Kavita by Narahari Sharan

अाज का रावण

कल का रावण एक था
आज तो हैं अनेक
दहेज के लिए बहु जलाना
इनके कार्य हैं नेक

महिलाओं की इज्जत लूटना
इनका है अधिकार
बेबस और गरीब पर
करते अत्याचार

हत्या,अपहरण ,लूटपाट
इनके कार्य पुनीत
भ्रष्टाचार और काला धन
इनके नेक चरित्र

नेताओं के वेश में
करें कुकर्म अनेक
फौजी सीमा पर मरें
ये खातें हैं केक

खन् न माफिया भू माफिया
इनके नाम अनेक
शिक्षा माफिया हैं कई
रावण हैं प्रत्येक

जातिवाद और संप्रदाय
रावण के ही रुप
कट्टर सोंच हैं कुम्भकरण
करें समाज विद्रुप

रावण से तो घिर गया
अपना प्यारा देश
देश विरोधी बाते करना
दुखमय हैं संदेश

इन रावण के सामने
कौन बनेगा राम
भला करे भगवान तो
बने बिगड़े काम

बाबा हैं ढ़ोंगी बहुत
विकृत हुआ समाज
भला करें करतार तो
आए राम का राज

नरहरि शरण
L-256 चाणक्यपूरी ,गया
मोबाइल 9661736584

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One thought on “Pratiyogita Kavita by Narahari Sharan

  • September 16, 2017 at 10:48 am
    Permalink

    complete poem is not showing on website

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