Pratiyogita Kavita by Nitin Kalal

अज्ञानता के अंधकार में पलने वाला,
द्रोपती का चिर हरण करने वाला।
पत्नी की कोख का कातिल मैं,
बेटियों की अस्मिता लूटने वाला।
मैं नर हु,
नारायण का अंश नही मुझमे
मैं आज का रावण हूँ।।
मैं ही अंधविश्वास फैलाता हूँ।
आसाराम और राम-रहीम को,
मैं ही ईश्वर बनाता हूँ।
इंसान मैं झूठा और दिखावटी,
अपने कुल का विनाशी।
मैं नर हु,
नारायण का अंश नही मुझमे
मैं आज का रावण हूँ।।

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7 thoughts on “Pratiyogita Kavita by Nitin Kalal

  • August 31, 2017 at 4:55 am
    Permalink

    बहुत सुंदर रचना

  • August 31, 2017 at 4:57 am
    Permalink

    बहुत सुंदर रचना

  • August 31, 2017 at 7:40 am
    Permalink

    जबरदस्त रचना नितिन जी.

  • August 31, 2017 at 11:58 am
    Permalink

    बहुत अच्छी रचना है।

  • August 31, 2017 at 4:06 pm
    Permalink

    Very nice
    Ye Aj Ka Kadva satya he jo koi svikar nahi karna chahta

  • September 1, 2017 at 8:37 am
    Permalink

    Bahut KHUB nitin….acchi rachna he

  • September 6, 2017 at 8:55 am
    Permalink

    I am अप्रिसियेत your ग़ज़ल वैरी nice

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