#Pratiyogita Kavita by Rajeev Kumar Gupta

आज देश में रावण की कमी नहीं है भाई,
जिधर देखो उधर ही मिलते हैं,,,, हरज़ाई,

नाम किसी का लेकर करते  हैं,,,,,,,,,अत्याचार,
पूरी तरह से लिप्त हो चुके करने को व्यभिचार,

देश देश में घुसे हुये हैं, काटे अपनी जड़ को,
जड़ने को जब आए कोई, काटे उनके धड़ को,

मान भंग करे कन्या का,,,, ज़ोर ज़ोर हरषाये,
अपनी बारी आने पे क्यों ज़ोर ज़ोर चिल्लाये,

बच्चों की हत्या कर, भीख मांगने को कर प्रेरित,
सुंदर सुन्दर कोमल बच्चों का हत्यारा है प्रेरित,

अपने आस पास माहोलों में मिलेंगे अनेकों रावण,
आज देश में भरे पड़े हैं,,,,,,,, आदम जैसे रावण,

कोई बना है नेता,,,,,,, कोई बन गया अभिनेता,
दाग सभी के दामन पे हैं,,,,, कोई नहीं है धोता,

देश की संपत्ति को,,,,,,तो अपनी रैय्यत माने हैं,
देना है जब टैक्स इन्हे तो, अपनी मैय्यत माने है ,

हर साल हम फुकें रावण,,,,,,,पर रावण नहीं जले,
रावण को गर मारो, तो अपने तन मन अलख जगे,

बाहर के रावण को,,,,,,,,,,,,,मत ढूंढो तुम मेरे यार,
हाथ जोड़ विनती सुनो,,,,,,,,,,खुद सुधरो मेरे यार।

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