Pratiyogita Kavita by Rajesh Kamal

मैं नहीं मरा हूं अभी
मैं नहीं डरा हूं कभी
कर के अट्टहास हर क्षण
कहता है ये आज का रावण !

घृणा द्वेष पाखण्ड भ्रष्टाचार
हत्या अपहरण चोरी दुराचार
कितने ही शरीर कर रखे हैं धारण
बड़ा मायावी है आज का रावण !

सज्जनता का पहन नकाब
लगाता फिरता है वो आग
पल में बन जाता विनाश का कारण
बड़ा क्रूर है आज का रावण !

हर घर में लंका बनी हुई
हर मन में शंका बनी हुई
एक राम के बस में नहीं है मारण
अजर-अमर है आज का रावण !

झूठ फरेब लंपटता मक्कारी
बढ़ रही है हरेक बीमारी
असंभव है अब इसका निवारण
नस-नस में है आज का रावण!

मैं नहीं मरा हूं अभी
मैं नहीं डरा हूं कभी
कर के अट्टहास हर क्षण
कहता है ये आज का रावण !!!

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