#Pratiyogita Kavita by Rakesh Dhar Dwivedi

इतने राम कहा से लाऊ
घर घर मे बैठे है रावण
इतने राम कहा से लाऊ
अन्तस मे हे फैला अधियास
उसको दूर कैसे भगाऊ

सदियो से अग्निपरीक्षा दे रही है सीताए
इस परम्परा को समाप्त कर
घर- उपवन को कैसे महकाऊ
इतने राम कहा से लाऊ
गंगा की अविरल धारा मे
हो गया है बहुत प्रदुषण
स्वच्छ – निर्मल कर सके जो पतितपावन मैया को
वह भागीरथ कहा से लाऊ
अन्तस मे जो फैला अधियारा
उसको दूर कैसे भगाऊ
 इतने राम कहा से लाऊ
चहुँ और है फैला भ्रष्टाचार
नही है कोई बोलने वाला
सुप्त पडी इस राष्ट्र चेतना को
पुनः मे कैसे जगाऊ
अभिव्यंजना का स्वर- कैसे बनजाऊ
इतने राम कहा से लाऊ
गरीब निर्बल असहाय जनो का जो सम्बल बन जाए
वो मोहनदास कहा से लाऊ
कैसे मे निर्बल असहाय जनो के
अधरो की मुस्काहट बन जाऊ
इतने राम कहा से लाऊ 
                                                              राकेश धर दिवेदी
                                                     5/58 विनीत खण्ड गोमती नगर लखनऊ
                                                           मो0 नम्बर – 9910683569

 

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