#Pratiyogita Kavita by Rameshwari Baratwal

एक वो रावण था
जिसने हरण किया परायी नार का
जिसके दिलों-दिमाग में
प्रदा था अहंकार का

सीता हरण करकर भी
सम्मान किया न तार -तार
सीता की पवित्रता उसने रखी
बरकरार

एक आज का रावण है
रिश्तों से करता खिलवाड़
हवस का बनकर पूजारी
रोज करता है
बलत्कार
कभी घर में,कभी अँधेरे में
रोती कोई मासूम लाचार

सीता हरण कर उसने
बिछाया माया जाल
राम के हाथो मोक्ष मिले
ये उसकी थी दरकरार

वो सतयुगी रावण था
ये कलयुगी रावण है
उसने हरण कर भी
बचा कर रखा सम्मान
आज के रावण ने
हवस में ली जान

जालते है कई रावण
पुतले बने रावण को
पुतला बना रावण
देखकर रावणो की फ़ौज को
करने लगता हहाकार
रावण ही रावण को जलाये
ये नही स्वीकार
ये नही स्वीकार

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One thought on “#Pratiyogita Kavita by Rameshwari Baratwal

  • September 15, 2017 at 6:51 am
    Permalink

    बहुत सूंदर रचना नादान जी

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