#Pratiyogita Kavita by Rifat Shaheen

कल का रावण लड़ा राम से बहना के सम्मान में
वह नारी को हर लाया पर किया नही अपमान रे
सीता की पावनता का प्रमाण अग्नि परीक्षा थी
मरते मरते रावण ने ली राम से दीक्षा थी
रावण जो दम्भी था लेकिन लूटा नही किसी को
नही किया बलात्कार भी ठगा नही किसी को
वो केवल बदले की प्रबल भावना से प्रेरित था
बहना के अपमान से उसका दम्भी मन दुखित था
पर आज का रावण स्वार्थहित में ऐसा लिप्त हुआ है
बहन,भाई, मात पिता को हेय समझ चुका है
स्वार्थ वश वह बहना को पहुंचा देता कोठे पर
और भाई का गला काट कब्ज़ा करता भूमि पर
मां जननी और पिता श्रेष्ठ को पहुंचता वृद्धालय
और पराई नारी को दिखलाता वेश्यालय
मित्रता की बलि चढ़ाता स्वार्थ साधता अपना
धन,यश और स्वहित का देखा करता सपना
हो अपवाद भले ही लेकिन देखा ये भी गया है
भी ने ही सगी बहन की लाज से खेला कई दफ़ा है
अखबारों में देखो तो हर रोज़ लिखा मिलेगा
बेटे ने पिता को मारा माता का अपमान किया
भाई को बांके से काटा बहना से सहवास किया
पत्नी को पेट्रोल डाल कर स्वाहा किया गया है
प्रेमिका को गर्भवती कर लांछन दे दुत्कारा है
रिश्तों की मर्यादा का अब भान उसे नही है
केवल अपनी सन्तुष्टि में जीना यही खुशी है
आज का रावण अपनी लंका नही जलाता रिश्तों पर
बल्कि सबका छीन छान कर स्वयं बैठता कुर्सी पर
उस रावण को मार राम ने दंभी का था नाश किया
रावण ने भी मोक्ष पाकर बैकुंठ में था वास् किया
लेकिन आज के रावण का वध कौन करे मारे उसको
कौन उठाये सशत्र कौन राम तारे उसको
सब के अंदर कहीं न कहीं अपना हित बसा है
क्योंकि हम सभी मे रिफ़अत एक रावण छुपा है

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