#Pratiyogita Kavita by Rishabh Tomar Radhe

मैं हँसते हँसते गुम हो जाता हूँ
खुद नही रहता तुम हो जाता हूँ

पायल बिंदी औऱ काजल में खो
खुद को भूलकर गजल हो जाता हूँ

पूजा की थाली में सोभित चंदन रोली संग
तेरे माथे का कुमकुम हो जाता हूँ

तुम्हारे सरबती लबों के छूने से ही
मैं स्वेत बालु का गंगाजल हो जाता हूँ
जो हर किसी डाली पर नही खिलता है
वो तुम्हारे लिये गुलाबी कमल हो जाता हूँ

तुम्हारे जैसा बनने के चक्कर में
मैं ‘ऋषभ’ नही रहता ‘राधे’ हो जाता हूँ

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