#Pratiyogita Kavita by Shambhu Nath

आज का रावण

पग पग रावण मिलते अब तो ||
कन्याओं को हर रहे है ||
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे है ||
कभी भेष साधू का धर  कर ||
मण्डप महल सजाते है ||
मौका पाय हैवान वे बनते ||
दामन पर दाग लगाते है ||
मीठी मीठी बातो से अपनी ||
अबलाओ को छल रहे है ||
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे है ||
कभी छुपा रुस्तम बन वे  ||
पीछे से बाण चलाते है ||
उनकी चतुर चौकड़ी में फंस ||
उन्ही को व्यथा सुनाते है ||
समय देख कर हरण है करते ||
कलियों को कैसे मसल रहे है ||
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे है ||
सब खिलाफत कर नहीं पाते ||
मन मसोस रह जाते है ||
कुछ लोगो के डेरे पर तो ||
नेता अफसर आते है ||
अनदेखी जनता जब करती ||
तब अइसे रावण सफल रहे है ||
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे है ||

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