#Pratiyogita Kavita by Sumit Bhardwaj

उठो अभी उठो अभी,
ये राम जी के लाल तुम
कर दो सर्वनाश आज,
रावणों का काल तुम,
कलयुग के रावणों का काल,
बढ़ रहा है जोर से,
छा रहा है अंधकार,
देखो चारों ओर से,
उन नीच दुष्ट रावणो को,
मार के गिराओ तुम,
डरो नही किसी से भी,
खुद राम ही बन जाओ तुम,
उठो अभी उठो अभी,
ये देश के तुम लाडलो,
डरो नहीं डरो नहीं,
हर पाप का हिसाब लो,
नाश हो विनाश हो,
या चाहे सर्वनाश हो,
आज के इन रावणो का,
आखरी ये मास हो,
डरो नही डरो नही,
ऐ देश के कृपालु तुम,
उठो अभी उठो अभी,
ये राम जी लाल तुम,
कर दो सर्वनाश आज,
रावणों का काल तुम,
अंजनी के लाल बनो,
श्री राम सा निहाल बनो,
लक्ष्मण सा वीर बनके,
रावण का काल बनो,
ऐसे दुष्ट पापियों का,
कर दो शर्वनाश आज,
बजरंबली का रूप,
लेके विक्राल बनों,
चाहे तुम निढाल बनो,
चाहे तुम विशाल बनो,
याद रहे भारत माँ का भी,
एक लाल बनों,
ऐसा काम कर जाओ,
इस पावन सी धरती पर,
कि जीती जागती एक,
जिन्दा मिशाल बनों।
सुमित भारद्वाज
मोहम्मदी खीरी,
जिला- लखीमपुर खीरी, उ.प्र.
उम्र- 23
शिक्षा- एम. कॉम.
मो.- 9125713792
8840222027

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6 thoughts on “#Pratiyogita Kavita by Sumit Bhardwaj

  • September 25, 2017 at 4:23 pm
    Permalink

    शानदार रचना। बधाई

  • September 25, 2017 at 4:32 pm
    Permalink

    Wahhhh wahhhh bahut khoob

  • September 25, 2017 at 5:59 pm
    Permalink

    बहुत ही उम्दा कविता है ।

  • September 26, 2017 at 3:02 am
    Permalink

    Suprbbbb
    Very good bro…

  • September 26, 2017 at 3:05 am
    Permalink

    Waah bhai waah lajawab kavita bahut acche

  • September 28, 2017 at 12:56 pm
    Permalink

    Great line sumit g

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