Pratiyogita Kavita by Sweety Goswami Bhargawa

आज का रावण
चारों तरफ चर्चा है मेरा मै सत्य पर पौरुष का
एक बड़ा उदाहरण हूँ
मै रावण हूँ मै रावण हूँ
माना मैने किया था सीता का हरण किन्तु उसने
भी किया रहा स्वयं किया था चुनोतियों का वरण
खींची थी जब लक्ष्मण ने लक्ष्मण रेखा तो क्यों
सीता ने उसको पार किया।क्यों न रोका खुद को
क्यों याचक की प्रार्थना को स्वीकार किया
सीता के एक गलत कदम ने रावण के बल को बढ़ाया था
माना मैने क़ि मै छदम् वेश में द्वार पर तेरे आया था
उठाया मैने सीता को मैने उसका हरण किया
किन्तु क्यों एक धोबी की बात को सुनकर तुमने
सीता का परितरण किया
तुमसे तो मै अच्छा था राम जानकी को बंधन में
रखकर भी सदैव अपने आस पास ही पाया था
तुम तो थे तीनों लोक के ज्ञाता फिर तुमको
किसने भ्रमाया था
मै रावण अहम है मुझमें है मुझमें अथाह बाहुबल
किन्तु कुछ नही किया मैने ऐसा जिससे हो
सीता का ह्रदय विकल
मै चाहता तो सीता को तुम तक न आने देता
हो मर्यादा पुरूषोत्तम तुम ये नाम न तुम तक
जाने देता।
मैने किया था सीता का हरण लेकिन उसकी
हर बात का मान रखा
उसकी इच्छा के विरुद्ध न हाथ लगाया उसको
सदैव अपनी मर्यादा का ध्यान रखा
चाहे जो होती है बातें होने दो
लेकिन मै आज भी सत्य पर पौरुष का एक
उदाहरण हूँ
हाँ रावण हूँ मै रावण हूँ
लेखक– स्वीटी गोस्वामी भार्गव  , पता 32/35 लोहामंडी खातीपाड़ा काना पटेली
आगरा – फोन न 7088988123

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