#Pratiyogita Kavita by Uday Shankar Chaudhari

आज का रावण उस रावण से ज्यादा अत्याचारी है
आर्तनाद तुम सुने नहीं फिर रोती सीता नारी है
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रामलला अभी वन में हीं अश्रु बहाए फिरते हैं
जोर जुल्म रावण का है ठोकर खाए फिरते हैं
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इस युग के रावण ने तो उस रावण को मात दिया
आज मनुजता हुई विकल निर्दयता से घात किया
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राम अभी भी हैं वन में रावण सबके अंतर में है
पुतले जलते रावण के जिंदा रावण घर घर में है
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आज का रावण वेश बदल कर बम बारुद चलाता है
बसी बसाई बस्ती में नफरत की आग लगाता है
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हम रावण को देख रहे हैं काश्मीर की गलियों में
कैराना बंगाल में देखा देश के अक्सर गलियों में
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तुम्हें दिखाई नहीं देता ये दृष्टा सृष्टा हीं जाने
पर हमें दिखाई देता है भले ये दुनिया ना माने
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आज जटायू भी मौन रावण अटहास रहा है
बहन बेटियों की अस्मत पल पल फांस रहा है
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वो रावण तो रोता होगा इस रावण के भय से
आज विभीषन बचा नहीं मैं कहता सत्य हृदय से
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धीरज का सम्बल टुटा राम हैं कोपभवन में
दशरथ जी ने तजा प्राण चिंतन और मनन में
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विजया दशमी को रावण अब और नहीं जलाओ
पहले रावण मन का मारो रावण बाद जलाओ

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