#Pratiyogita Kavita by Vivek Bhaskar

 

“विजय दशमी ”

आते तालो पर ताल ठोक ।
तालो पर ताल जमाते थे ।।
तालो पर ताले ठोक ठोक ।
सब जौहर अपनाते थे ।।

कोमल कठौर नादान सूर
बर्छी भाला कृपाण लिये
कोई पैदल , रथ पर सवार
कर मे धनु और बाण लिये

भिड गये एक से चार चार
कोई हथियार सम्हाल रहा

कोई चिल्लाता दिलवर को
कोई दमभर ललकार रहा
ऐसी भिडंत कौ करौ अंत
देखे बसंत मुस्कान लगे

फिर पतझड ,हर उपवन मे , उपजा
मधु मंद मंद गंद वरसाने लगे

ऐसी भिडंत कौ करो अंत
देखे वंसत मुस्कान लगे

 

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