B 0213 – S K Gupta

Gazal :

काश जिंदगी किसी दूकान पर बिकती

तरह तरह के रंगों में सजी हुई दिखती

खरीदने वालों की भी भीड़ लगी रहती

खरीदते वो जो हमे सबसे अच्छी लगती

मोल ज्यादा देकर खरीद लेता मैं भी तो

जो मुझे खूबसूरत बहुत हसीन दिखती

दिल को भी कितना सुकून मिलता मेरे

लिबासे वफा पहन कर साथ मेरे रहती

कितना खूबसूरत मंजर होता वह भी तो

जो दिल मेरा चाहता वही तो वह करती

मेरे ही इशारों पर वहआसमान छू लेती

मुझे कभी आजमाने की जुर्रत न करती

सारी ही मुश्किलों का हल निकल आता

काश जिंदगी किसी दूकान पर बिकती


Gazal :

काश जिंदगी किसी दुकान पर बिकती
खरीदते वो जो हमे सबसे अच्छी लगती

खरीदने वालों की भी भीड़ लगी रहती
तरह तरह के रंगों में सजी हुई दिखती

मोल ज्यादा देकर खरीद लेता मैं भी तो
जो मुझे खूबसूरत बहुत हसीन दिखती

दिल को भी कितना सुकून मिलता मेरे
लिबास वफा का पहन साथ मेरे रहती

कितना खूबसूरत मंजर होता वह भी तो
जो दिल मेरा चाहता वही तो वह करती

मेरे ही इशारों पर वहआसमान छू लेती
मुझे कभी आजमाने की जुर्रत न करती

पुरानी हो जाती तो नई बदल के ले आते
काश जिंदगी किसी दुकान पर बिकती

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