#Shayari by Ajay Jain

गर्मी है गफलतों की खोखली नसीहत खून देख खून भी खौलता नही

 

जनमत जग हसाई जनता मांगती दुहाई सत्य पासंग मे भी तोलता नही

 

गूंज कर लौटा दी गई फाइलें फरियाद की गूंगे हुये सारे कोई बोलता नही

 

कानून का सिपाही डर से डगमगाया राज अपराधियों के खोलता नही

अजय अविराम

 

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