#Shayari by Akash Khangar

हासिल इश्क़ है उसका

हासिल रूह हुई उसकी

बस मोहब्बत का दायरा यही तो है

 

न जिस्म की चाहत थी

न हासिल करने की आरजू

मोहब्बत का कायदा यही तो है

 

मेरे न होने की कमी सताती है उसको

उसकी रूह में उतरा हूँ मैं

वो हो बेखबर पर खबर सभी को है ये

मेरी गजलो में जिक्र उसी का ही तो है

 

सुर्ख आँखे भी करती है मुझसे सवाल

आँखों में नमी चेहरे पर जलाल

यूँ ही आकाश को देखकर ये आया ख्याल

मेरा सूनापन मेरा अफ़साना देन उसी की तो है…आकाश खंगार

 

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