#Shayari by Akash Singh Hardoi

किस-किस से मोहब्बत करे जनाब,
हम तो जिस महफ़िल में गाते है वो दीवाने हो जाते है

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दरबार तेरे आया हूँ सिर को झुकाउंगा

जो गीत लिखे मैंने है वो गीत गाऊंगा

इतनी मेरी विनती है माँ सुर को सजा ही दो

दर्शन को तेरे पा के ही मैं घर को जाऊंगा।

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होंठो से मुझे आज लगाया है आपने

महफ़िल में मेरे गीत को गाया है आपने

बस आपकी दुआ से ही आया हूं मैं यहाँ

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