#Shayari by Anand Pathak

हम न होंगे तो किसी और को बुलालोगे

अपने अरमानों को भी शायद तुम छुपालोगे

जला तो सकते हो भेजे हुए मिरे ख़त को

पर अपने दिल से मुझे कैसे तुम निकालोगे।

 

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तेरे ही ख्वाब मेरे दिल में अब सजाऊँ मैं

तेरी तस्वीर हर एक हर्फ़ से बनाऊँ मैं

भले न याद रहे सांस लेना मुमकिन है

ये तो मुमकिन नहीं कि तुझको भूल जाऊँ मैं।

 

–आनंद पाठक–

बरेली (उत्तर प्रदेश)

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