#Shayari by किशोर छिपेश्वर सागर

मुनासिब है भी या नहीं
तुमसे मिल सकेंगे भी या नहीं
चमन में है विरानियां
ये गुल खिल सकेंगे भी या नहीं
बेजान से हो गये है हम
पता नहीं तुम्हारे बिना
हम तनहा जी सकेंगे भी या नहीं
–किशोर छिपेश्वर “सागर”
बालाघाट (म.प्र.)

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