#Shayari by Akash Khangar

सोया मैं भी नही और तुम भी
खोया हुआ मैं भी और तुम भी
तन्हा मैं भी और तुम भी
क्यों कसम खाये बैठे हो
आओ न कुछ बातें करे मैं भी और तुम भी…आकाश खंगार

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ड़ा अजीब वाकिया देखा मैंने
ईमान को शर्मशार होते देखा मैंने
जो भरते रहे दम खुद के रसूखदार होने का
उन्हें ही बेईमान होते देखा मैंने
एक मैं ही अच्छा बनकर क्या करूँ
अच्छे अच्छो को शैतान बनते देखा मैंने…आकाश खंगार

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कल जब तुम मेरे सामने आना
थोड़ी गैरत भी अपने साथ लाना
मैं न पोछ सकूँगा पछतावे के आँसू
जिसके हो गए हो तुम उसे साथ ले आना…आकाश खंगार
[10:02 PM, 12/10/2016] Akash Khangar:

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