#Shayari by Akash Khangar

अर्जियाँ लगा आया हूँ , हर मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में

ऐतराज़ है खुदा को शायद ,तुझे मेरी दुल्हन बनाने में

अब क्या करूँ फ़ैसला खुदाई है,

मगर

जीने में क्या जीना है, बिन तेरे जिए जाने में…आकाश खंगार

दिल तो करता है हरिद्वार चला जाऊँ

श्री चरणों का ध्यान करूँ

मन ईश्वर में लगाऊँ

शायद अब एक यही रास्ता मेरे पास

शायद इससे मैं तुझे भूल पाऊँ…आकाश खंगार

जितना जिया हूँ जैसे जिया हूँ

उन अहसासों बाँट देता हूँ

तुम्हारे जज्बातों को आग देता हूँ

तुम दो मेरा साथ तो ये वादा मेरा

हर जज्बे को लब्जो से माप देता हूँ…आकाश खंगार

सच बोलो

आज सुबह जब उठे तुम

मेरी याद साथ थी न

आज की सुबह में कोई बात थी न

मैं good morning कहुँ इंतज़ार था न

तुम्हारी आँखों में थोड़ा खुमार था न

सच कहो मेरा इंतज़ार था न…आकाश खंगार

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